Humein aap ki jaan nahi sirf saath chahiye, Sacche ishq ka sirf ek ehsaas chahiye, Jaan toh ek pal mein di jaa sakti hain, Pr hume apki mohabbat aakhri sans tk chahiye - See more at:
Monday, 27 April 2015
Badi fursat se tumhein dekhta hun,
Badi fursat se tumhein dekhta hun,
Badi muddat se tumhein chahta hun,
Badi muddat se tumhein chahta hun,
Meri izzat, mera imaan tujh se hai,
Usi neeyat se tumhein dekhta hun,
Usi neeyat se tumhein dekhta hun,
Tujhme chhupi meri tamaam khushiya,
Apni puri duniya tumhein maanta hun,
Apni puri duniya tumhein maanta hun,
Shayad mil jaaye tujhme khuda mujhe,
Badi hasrat se tumhein poojta hun….!
Badi hasrat se tumhein poojta hun….!
"Love Story"
We were both young when I first saw you.
I close my eyes and the flashback starts:
I'm standing there on a balcony in summer air.
See the lights, see the party, the ball gowns.
See you make your way through the crowd
And say, "Hello, "
Little did I know...
That you were Romeo, you were throwing pebbles,
And my daddy said, "Stay away from Juliet"
And I was crying on the staircase
Begging you, "Please don't go"
And I said...
Romeo, take me somewhere we can be alone.
I'll be waiting; all that's left to do is run.
You'll be the prince and I'll be the princess,
It's a love story, baby, just say, "Yes".
So I sneak out to the garden to see you.
We keep quiet 'cause we're dead if they knew
So close your eyes... escape this town for a little while.
Oh, oh.
'Cause you were Romeo - I was a scarlet letter,
And my daddy said, "Stay away from Juliet"
But you were everything to me,
I was begging you, "Please don't go"
And I said...
Romeo, take me somewhere we can be alone.
I'll be waiting; all that's left to do is run.
You'll be the prince and I'll be the princess.
It's a love story, baby, just say, "Yes".
Romeo, save me, they're trying to tell me how to feel.
This love is difficult but it's real.
Don't be afraid, we'll make it out of this mess.
It's a love story, baby, just say, "Yes".
Oh, oh.
I got tired of waiting
Wondering if you were ever coming around.
My faith in you was fading
When I met you on the outskirts of town.
And I said...
Romeo, save me, I've been feeling so alone.
I keep waiting for you but you never come.
Is this in my head? I don't know what to think.
He knelt to the ground and pulled out a ring and said...
Marry me, Juliet, you'll never have to be alone.
I love you, and that's all I really know.
I talked to your dad - go pick out a white dress
It's a love story, baby, just say, "Yes".
Oh, oh, oh, oh, oh.
'Cause we were both young when I first saw you
I close my eyes and the flashback starts:
I'm standing there on a balcony in summer air.
See the lights, see the party, the ball gowns.
See you make your way through the crowd
And say, "Hello, "
Little did I know...
That you were Romeo, you were throwing pebbles,
And my daddy said, "Stay away from Juliet"
And I was crying on the staircase
Begging you, "Please don't go"
And I said...
Romeo, take me somewhere we can be alone.
I'll be waiting; all that's left to do is run.
You'll be the prince and I'll be the princess,
It's a love story, baby, just say, "Yes".
So I sneak out to the garden to see you.
We keep quiet 'cause we're dead if they knew
So close your eyes... escape this town for a little while.
Oh, oh.
'Cause you were Romeo - I was a scarlet letter,
And my daddy said, "Stay away from Juliet"
But you were everything to me,
I was begging you, "Please don't go"
And I said...
Romeo, take me somewhere we can be alone.
I'll be waiting; all that's left to do is run.
You'll be the prince and I'll be the princess.
It's a love story, baby, just say, "Yes".
Romeo, save me, they're trying to tell me how to feel.
This love is difficult but it's real.
Don't be afraid, we'll make it out of this mess.
It's a love story, baby, just say, "Yes".
Oh, oh.
I got tired of waiting
Wondering if you were ever coming around.
My faith in you was fading
When I met you on the outskirts of town.
And I said...
Romeo, save me, I've been feeling so alone.
I keep waiting for you but you never come.
Is this in my head? I don't know what to think.
He knelt to the ground and pulled out a ring and said...
Marry me, Juliet, you'll never have to be alone.
I love you, and that's all I really know.
I talked to your dad - go pick out a white dress
It's a love story, baby, just say, "Yes".
Oh, oh, oh, oh, oh.
'Cause we were both young when I first saw you
Sunday, 26 April 2015
तात्या टोपे
'दांतों में उंगली दिए मौत भी खड़ी रही,
फौलादी सैनिक भारत के इस तरह लड़े
अंग्रेज बहादुर एक दुआ मांगा करते,
फिर किसी तात्या से पाला नहीं पड़े।'

तात्या टोपे का जन्म 1814 में येवला में हुआ। तात्या का वास्तविक नाम रामचंद्र पांडुरंग राव था, परंतु लोग स्नेह से उन्हें तात्या के नाम से पुकारते थे। पिता का नाम पांडुरंग त्र्यंबक भट था तथा माता का नाम रुक्मिणी बाई था। वे एक देशस्थ कुलकर्णी परिवार में जन्मे थे।
उनके पिता बाजीराव पेशवा के धर्मदाय विभाग के प्रमुख थे। उनकी विद्वत्ता एवं कर्तव्य परायणता देखकर बाजीराव ने उन्हें राज्सभा में बहुमूल्य नवरत्न जड़ित टोपी देकर उनका सम्मान किया था, तबसे उनका उपनाम 'टोपे' पड़ गया।
तात्या टोपे को सन् 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणीय वीरों में उच्च स्थान प्राप्त है। उनका जीवन अद्वितीय शौर्य गाथा से भरा हुआ है।
तात्या के बारे में कुछ विशिष्ठ बातें....
* पेशवाई की समाप्ति के पश्चात बाजीराव ब्रह्मावर्त चले गए। वहां तात्या ने पेशवाओं की राज्यसभा का पदभार ग्रहण किया।
* 1857 की क्रांति का समय जैसे-जैसे निकट आता गया, वैसे-वैसे वे नानासाहेब पेशवा के प्रमुख परामर्शदाता बन गए।
* तात्या ने 1857 की क्रांति में अंग्रेजों से अकेले सफल संघर्ष किया।
* 3 जून 1858 को रावसाहेब पेशवा ने तात्या को सेनापति के पद से सुशोभित किया। भरी राज्यसभा में उन्हें एक रत्नजड़ित तलवार भेंट कर उनका सम्मान किया गया।
* तात्या ने 18 जून 1858 को रानी लक्ष्मीबाई के वीरगति के पश्चात गुरिल्ला युद्ध पद्धति की रणनीति अपनाई। तात्या टोपे द्वारा गुना जिले के चंदेरी, ईसागढ़ के साथ ही शिवपुरी जिले के पोहरी, कोलारस के वनों में गुरिल्ला युद्ध करने की अनेक दंतकथाएं हैं।
* 7 अप्रैल 1859 को तात्या शिवपुरी-गुना के जंगलों में सोते हुए धोखे से पकड़े गए। बाद में अंग्रेजों ने शीघ्रता से मुकदमा चलाकर 15 अप्रैल को 1859 को राष्ट्रद्रोह में तात्या को फांसी की सजा सुना दी।
* 18 अप्रैल 1859 की शाम ग्वालियर के पास शिप्री दुर्ग के निकट क्रांतिवीर के अमर शहीद तात्या टोपे को फांसी दे दी गई। इसी दिन वे फांसी का फंदा अपने गले में डालते हुए मातृभूमि के लिए न्यौछावर हो गए थे।
महात्मा ज्योतिबा फुले
महात्मा ज्योतिबा फुले का जन्म 11 अप्रैल 1827 को पुणे में हुआ था। उनकी माता का नाम चिमणाबाई तथा पिता का नाम गोविन्दराव था। उनका परिवार कई पीढ़ी पहले माली का काम करता था। वे सातारा से पुणे फूल लाकर फूलों के गजरे आदि बनाने का काम करते थे इसलिए उनकी पीढ़ी 'फुले' के नाम से जानी जाती थी।

ज्योतिबा बहुत बुद्धिमान थे। उन्होंने मराठी में अध्ययन किया। वे महान क्रांतिकारी, भारतीय विचारक, समाजसेवी, लेखक एवं दार्शनिक थे। 1840 में ज्योतिबा का विवाह सावित्रीबाई से हुआ था।
महाराष्ट्र में धार्मिक सुधार आंदोलन जोरों पर था। जाति-प्रथा का विरोध करने और एकेश्वरवाद को अमल में लाने के लिए ‘प्रार्थना समाज’ की स्थापना की गई थी जिसके प्रमुख गोविंद रानाडे और आरजी भंडारकर थे।
उस समय महाराष्ट्र में जाति-प्रथा बड़े ही वीभत्स रूप में फैली हुई थी। स्त्रियों की शिक्षा को लेकर लोग उदासीन थे, ऐसे में ज्योतिबा फुले ने समाज को इन कुरीतियों से मुक्त करने के लिए बड़े पैमाने पर आंदोलन चलाए। उन्होंने महाराष्ट्र में सर्वप्रथम महिला शिक्षा तथा अछूतोद्धार का काम आरंभ किया था। उन्होंने पुणे में लड़कियों के लिए भारत की पहला विद्यालय खोला।
इन प्रमुख सुधार आंदोलनों के अतिरिक्त हर क्षेत्र में छोटे-छोटे आंदोलन जारी थे जिसने सामाजिक और बौद्धिक स्तर पर लोगों को परतंत्रता से मुक्त किया था। लोगों में नए विचार, नए चिंतन की शुरुआत हुई, जो आजादी की लड़ाई में उनके संबल बने।
इस महान समाजसेवी ने अछूतोद्धार के लिए सत्यशोधक समाज स्थापित किया था। उनका यह भाव देखकर 1888 में उन्हें 'महात्मा' की उपाधि दी गई थी। ज्योतिराव गोविंदराव फुले की मृत्यु 28 नवंबर 1890 को पुणे में हुई।
अद्वितीय प्रतिभा के धनी डॉ. भीमराव अम्बेडकर
जन्म : 14 अप्रैल, 1891
मृत्यु : 6 दिसम्बर, 1956

मनुष्य को जीने के लिए रोटी ही नहीं चाहिए, उसके पास दिमाग है, जिसे विचारों के भोजन की आवश्यकता है- डॉ. अम्बेडकर
'हम हैं दरिया हमें अपना हुनर मालूम है, जिस तरफ निकल जाएंगे, वहीं रास्ता बना लेंगे'- यही उक्ति डॉ. भीमराव अम्बेडकर के जीवन संघर्ष का प्रतीक है। वे अनन्य कोटि के नेता थे, जिन्होंने अपना समस्त जीवन समग्र भारत की कल्याण कामना में उत्सर्ग कर दिया। खासकर भारत के 80 फीसदी दलित सामाजिक व आर्थिक तौर से अभिशप्त थे, उन्हें अभिशाप से मुक्ति दिलाना ही डॉ. अम्बेडकर का जीवन संकल्प था।
14 अप्रैल 1891 को महू में सूबेदार रामजी शकपाल एवं भीमाबाई की 14वीं संतान के रूप में डॉ. भीमराव अम्बेडकर का जन्म हुआ था। उनके व्यक्तित्व में स्मरणशक्ति की प्रखरता, बुद्धिमत्ता, ईमानदारी, सच्चाई, नियमितता, दृढ़ता, संग्रामी स्वभाव का मेल था। संयोगवश भीमराव सातारा गांव के एक ब्राह्मण शिक्षक को बेहद पसंद आए। वे अत्याचार और लांछन की तेज धूप में टुकड़ा भर बादल की तरह भीमराव के लिए मां के आंचल की छांव बन गए। बाबासाहंब ने कहा- वर्गहीन समाज गढ़ने से पहले समाज को जातिविहीन करना होगा। समाजवाद के बिना दलित-मेहनती इंसानों की आर्थिक मुक्ति संभव नहीं।
डॉ. अम्बेडकर की रणभेरी गूंज उठी, 'समाज को श्रेणीविहीन और वर्णविहीन करना होगा क्योंकि श्रेणी ने इंसान को दरिद्र और वर्ण ने इंसान को दलित बना दिया। जिनके पास कुछ भी नहीं है, वे लोग दरिद्र माने गए और जो लोग कुछ भी नहीं है वे दलित समझे जाते थे।'
बाबासाहेब ने संघर्ष का बिगुल बजाकर आह्वान किया, 'छीने हुए अधिकार भीख में नहीं मिलते, अधिकार वसूल करना होता है।' उन्होंने कहा है, 'हिन्दुत्व की गौरव वृद्धि में वशिष्ठ जैसे ब्राह्मण, राम जैसे क्षत्रिय, हर्ष की तरह वैश्य और तुकाराम जैसे शूद्र लोगों ने अपनी साधना का प्रतिफल जोड़ा है। उनका हिन्दुत्व दीवारों में घिरा हुआ नहीं है, बल्कि ग्रहिष्णु, सहिष्णु व चलिष्णु है।'
बड़ौदा के महाराजा सयाजीराव गायकवाड़ ने भीमराव अम्बेडकर को मेधावी छात्र के नाते छात्रवृत्ति देकर 1913 में विदेश में उच्च शिक्षा के लिए भेज दिया। अमेरिका में कोलंबिया विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र, मानव विज्ञान, दर्शन और अर्थ नीति का गहन अध्ययन बाबासाहेब ने किया। वहां पर भारतीय समाज का अभिशाप और जन्मसूत्र से प्राप्त अस्पृश्यता की कालिख नहीं थी। इसलिए उन्होंने अमेरिका में एक नई दुनिया के दर्शन किए। डॉ. अम्बेडकर ने अमेरिका में एक सेमिनार में 'भारतीय जाति विभाजन' पर अपना मशहूर शोध-पत्र पढ़ा, जिसमें उनके व्यक्तित्व की सर्वत्र प्रशंसा हुई।
डॉ. अम्बेडकर के अलावा भारतीय संविधान की रचना हेतु कोई अन्य विशेषज्ञ भारत में नहीं था। अतः सर्वसम्मति से डॉ. अम्बेडकर को संविधान सभा की प्रारूपण समिति का अध्यक्ष चुना गया। 26 नवंबर 1949 को डॉ. अम्बेडकर द्वारा रचित (315 अनुच्छेद का) संविधान पारित किया गया।
डॉ. अम्बेडकर का लक्ष्य था- 'सामाजिक असमानता दूर करके दलितों के मानवाधिकार की प्रतिष्ठा करना।' डॉ. अम्बेडकर ने गहन-गंभीर आवाज में सावधान किया था- '26 जनवरी 1950 को हम परस्पर विरोधी जीवन में प्रवेश कर रहे हैं। हमारे राजनीतिक क्षेत्र में समानता रहेगी किंतु सामाजिक और आर्थिक क्षेत्र में असमानता रहेगी। जल्द से जल्द हमें इस परस्पर विरोधता को दूर करना होगी। वरना जो असमानता के शिकार होंगे, वे इस राजनीतिक गणतंत्र के ढांचे को उड़ा देंगे।'
बाबासाहेब एक मनीषी, योद्धा, नायक, विद्वान, दार्शनिक, वैज्ञानिक, समाजसेवी एवं धैर्यवान व्यक्तित्व के धनी थे। उनकी अद्वितीय प्रतिभा अनुकरणीय है।
Tree save & Life save
रो-रोकर पुकार रहा हूं,
हमें जमीं से मत उखाड़ो।
रक्तस्राव से भीग गया हूं मैं,
कुल्हाड़ी अब मत मारो।
आसमां के बादल से पूछो,
मुझको कैसे पाला है।
हर मौसम में सींचा हमको,
मिट्टी-करकट झाड़ा है।
उन मंद हवाओं से पूछो,
जो झूला हमें झुलाया है।
पल-पल मेरा ख्याल रखा है,
अंकुर तभी उगाया है।
तुम सूखे इस उपवन में,
पेड़ों का एक बाग लगा लो।
रो-रोकर पुकार रहा हूं,
हमें जमीं से मत उखाड़ो।
इस धरा की सुंदर छाया,
हम पेड़ों से बनी हुई है।
मधुर-मधुर ये मंद हवाएं,
अमृत बन के चली हुई हैं।
हमीं से नाता है जीवों का,
जो धरा पर आएंगे।
हमीं से रिश्ता है जन-जन का,
जो इस धरा से जाएंगे।
शाखाएं आंधी-तूफानों में टूटीं,
ठूंठ आंख में अब मत डालो।
रो-रोकर पुकार रहा हूं,
हमें जमीं से मत उखाड़ो।
हमीं कराते सब प्राणी को,
अमृत का रसपान।
हमीं से बनती कितनी औषधि।
नई पनपती जान।
कितने फल-फूल हम देते,
फिर भी अनजान बने हो।
लिए कुल्हाड़ी ताक रहे हो,
उत्तर दो क्यों बेजान खड़े हो।
हमीं से सुंदर जीवन मिलता,
बुरी नजर मुझपे मत डालो।
रो-रोकर पुकार रहा हूं,
हमें जमीं से मत उखाड़ो।
अगर जमीं पर नहीं रहे हम,
जीना दूभर हो जाएगा।
त्राहि-त्राहि जन-जन में होगी,
हाहाकार भी मच जाएगा।
तब पछताओगे तुम बंदे,
हमने इन्हें बिगाड़ा है।
हमीं से घर-घर सब मिलता है,
जो खड़ा हुआ किवाड़ा है।
गली-गली में पेड़ लगाओ,
हर प्राणी में आस जगा दो।
रो-रोकर पुकार रहा हूं,
हमें जमीं से मत उखाड़ो।
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